जमशेदपुर के इस साहित्यकार ने हिंदी की चौपाई में लिख डाली गीता, शीघ्र होगी आपके समक्ष

गीता के सभी 700 श्लोकों और 18 अध्यायों को आम बोलचाल की भाषा में उतारा, 25 साल में पूरी हुई रचना

senani.in

डिजिटल डेस्क

जमशेदपुर के गोविंदपुर निवासी साहित्यकार रोशन झा ने भागवत गीता के श्लोकों को हिंदी में चौपाई के रूप में लिखकर इसे जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी की है।

नाम है ‘सहज गीतामृत’। दिल्ली के एक प्रकाशन हाउस से जल्द ही प्रकाशित होकर यह पुस्तक हर व्यक्ति के हाथ में होगी। रोशन झा इस आधुनिक गीता की रचना में पिछले 25 वर्षों से जुटे थे। उन्होंने 15 वर्ष की उम्र में 1995 में यह रचना शुरू की थी।

हर हाथ में गीता पहुंचाना लक्ष्य

यह पूछने पर कि गीता लिखने की जरूरत क्यों पड़ी, जबकि यह पहले से ही सर्वसुलभ और दुनिया की लगभग हर भाषा में उपलब्ध है? रोशन झा कहते हैं कि जिस तरह गोस्वामी तुलसीदास ने बाल्मीकि रामायण को रामचरित मानस के जरिये सहज भाषा और चौपाई में लिखकर आम जनमानस तक सहजता से पहुंचाया, उसी प्रकार उन्होंने भी भगवान श्रीकृष्ण द्वारा श्लोक के रूप में दिए गए उपदेश को चौपाई के रूप में आज की पीढ़ी के मनोनुकुल रुचिपूर्ण बनाया है।

भगवान कृष्ण की कृपा

रोशन झा ने गीता के सभी 700 श्लोकों और 18 अध्यायों को हिंदी की सहज चौपाई में लिखा है। साथ ही उनका यह भी दावा है कि इसकी रचना करते समय उन्होंने संकल्प लिया था कि वे गीता में भगवान श्रीकृष्ण के उद्देश्य एवं भाव से शून्य मात्र भी हेरफेर नहीं करेंगे। उनका कहना है कि भगवान कृष्ण की कृपा से वे इस उद्देश्य में सफल भी रहे हैं।

सहज गीतामृत की कुछ चौपाइयां-

पहला अध्याय

धृतराष्ट्र बोले हे संजय, युद्ध हेतु कुरुक्षेत्र में पहुंचे।
पांडव के व पुत्र हमारे, कहो देख करते क्या सारे।१।
इस पर संजय बोले राजन, पांडव सैन्य देख दुर्योधन।
बोले द्रोणाचार्य से जाकर, आदर के संग शीश नवाकर।२।
देखिए गुरुवर सैन्य अपारा, व्यूह रचित धृष्टद्युम्न के द्वारा।
आपके पुत्र द्रुपद का बालक, इस व्यूह का है संचालक।३।
खड़ा देख संबंधी जन को, कष्ट हुआ कुंती नंदन को।
करुणा से भर अर्जुन डोला, श्रीकृष्ण से तब ये बोला।२७।
हे माधव इस युद्ध में आए, सब है अपने नहीं पराए।
देख के इनको सामने आया, सूखे मुख और कांपे काया।२८।
मुझ नीहत्थे को यह सारे, धृतराष्ट्र के पुत्र जो मारे।
बिन प्रतिरोध भी मारा जाऊं, उसमें भी कल्याण ही पाऊं।४६।
रणभूमि में तब हे राजन, शोक से व्याकुल होकर अर्जुन।
धनुषबाण से किया किनारा, रथ आसन का लिया सहारा।४७।

दूसरा अध्याय

हे राजन अर्जुन को ऐसे, देख शोक में व्याकुल जैसे।
अश्रु भी थे नेत्र में आए, तब श्रीकृष्ण ने वचन सुनाए।१।
अर्जुन यह अज्ञान है कैसा, श्रेष्ठ आचरण के ना जैसा।
अपयश ही यह फैलाएगा, स्वर्ग न इससे मिल पाएगा।२।
जैसे वस्त्र त्याग हम सारे, नव वस्त्रों को फिर से धारे।
आत्मा भी तो यही है करता, छोड़ पुराना नया है धरता।२२।
हे अर्जुन तुम जीतो हारो, इन दोनों को सम स्वीकारो।
ऐसे कर्म जो करता जाता, वही कर्म है योग कहाता।४८।

(इसी प्रकार रोशन ने गीता के सभी 700 श्लोकों को सहज हिंदी चौपाई में लिखा है)

बिहार के मधुबनी के हैं मूल निवासी

रोशन झा का जन्म 1980 में बिहार के मधुबनी जिले में साधारण किसान परिवार में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा भी गांव के ही एक स्कूल से हुई। बच्चों की शिक्षा एवं पारिवारिक उन्नति के उद्देश्य से उनका परिवार 1990 में दिल्ली पहुंचा। आगे की शिक्षा भी रोशन झा ने दिल्ली से ही हासिल की। साहित्य में बचपन से ही उनकी विशेष रुचि थी।

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