स्वार्थ

senani.in

@ उमेश शुक्ल

स्वार्थ के तेजाबी तेवर से
सराबोर है आज समाज

जो सरकारी नौकरी पा गए
वे करते नहीं कोई काज

हाथी के बुत बनते जा रहे
सभी सरकारी संस्थान

वेतन भत्तों का प्रबंध करने
में सरकारें हो रही हैं हैरान

सरकारी उपक्रमों ने कर
दिया है देश का बेड़ा गर्क

काम न होने के कारण
आया अर्थव्यवस्था पर जर्क

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