भारत के वीर

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@ शैलेश त्रिपाठी ‘शैल’

रखो नसों में बिजली, आंधी
आंखों में तेजोमय ज्वाला।
रक्षक है जो मातृभूमि का
तनिक नहीं डिगने वाला।।

वो तोपों से गर्जन करवाएंगे,
तुझे पथ से बहुत डिगाएंगे।
बम गोलों की वो झड़ी लगा,
थोड़ी हिम्मत दिखलाएंगे।

तेरी प्रखर चीर ललकार को सुन,
वो झटपट पीछे हट जाएंगे।
देख के अद्भुत शौर्य तेरा,
तेरी ताकत से मर जाएंगे।

तू योग्य, सुयोग्य युवा भारत का,
अपनी जोशीली अलखों को जगा।
कर कौशल उन्नत करके तू,
अब मातृभूमि का कर्ज चुका।।

तेरी ऊंची-तेजी बातों से,
दुश्मन के सीने फटते हैं।
उस हिम्मत की मैं दाद क्या दूं,
जिससे अरि के सिर कटते हैं।।

है भीषण अत्याचार यहां
नहीं ममता की कोई पुकार यहां।
सर्वस्व देश को अर्पण कर,
भर थोड़ी तू हुंकार यहां।।

तेरे ओज-तेज के चेहरे पे
ये निराशा कहां से आई है।
है लाल तू भारत भूमि का, सुन
जिससे दुनिया घबराई है।

अब उठ जा तू, सुन देर ना कर
दिखला दे रूप तू सिंह वाला।
बस बोल दे तू ए दुनिया वालों।
हिन्दुस्तान नहीं डिगने वाला।।

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