जीवन सौंदर्य

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@शैलेश त्रिपाठी ‘शैल’

उड़ गए तन से प्राण पखेरू
ना मांगे एक घड़ी मिली
मिले ना बच्चा और ना ही जोरू
बस काया धरती पे पड़ी मिली

ये जीवन अनमोल है इसको
सत कर्मों में लगाए जा
अब छोड़ के दुनिया के परपंच
श्री हरि की शरण में जाए जा

ना जाने कब दुनिया से जाने का न्योता आएगा
बस चंद पलों, कुछ हरकत से तेरा जीवन छिन जाएगा
घर, खेती और जायदाद की ना अब कोई कड़ी मिली
उड़ गए तन से प्राण पखेरु, बस काया जमीं पे पड़ी मिली

जीवन है वरदान प्रकृति का
जीती, उर्जित, विराट संस्कृति का
आओ इसको बड़ा बनाएं
मुर्दों में भी जान फूंक कर
आओ इस जीवंत बनाएं

(लेखक पंडित खुशीलाल शर्मा गवर्नमेंट ऑटोनोमस आयुर्वेदिक कॉलेज, भोपाल में अध्ययनरत हैं)

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