सावन के तीसरे सोमवार पर सोमवती अमावस्या का संयोग, भोलेनाथ के साथ विष्णु भगवान को भी प्रसन्न करने का मौका

महान ज्योतिषी आचार्य डॉ सुधानंद झा के अनुसार 20 जुलाई, दिन सोमवार को कर्क राशि में रहेंगे चंद्रमा, इस अवसर पर भोलेनाथ और भगवान विष्णु बरसाएंगे आशीर्वाद

senani.in

डिजिटल डेस्क

वर्ष 2020 का श्रावण मास अनोखे संयोग में है। इस बार श्रावण मास में पांच सोमवार हैं। इनमें से तीसरा सोमवार (20 जुलाई) अमावस्या तिथि के पवित्र संयोग में है।

इस दिन सावन की सोमवारी के साथ ही सोमवती अमावस्या भी पड़ रही है। इस अवसर पर भोलेनाथ के साथ विष्णु भगवान को भी प्रसन्न करने का अद्भुत मौका आया है।

दांपत्य जीवन होगा सुखमय

जो भी स्त्री-पुरुष इस दिन पूजा-अर्चना और व्रत करेंगे, उनके घर में सुख-समृद्धि आएगी। साथ ही उनका दाम्पत्य जीवन भी सुखमय बनेगा। इसके अलावा कुंवारे युवक-युवतियों की विवाह की बाधाएं भी दूर होंगी।

ऐसे बनता है सोमवती अमावस्या का संयोग

महान ज्योतिषी आचार्य डॉ सुधानंद झा के अनुसार यदि अमावस्या तिथि का संयोग सोमवार से हो जाए तो वह सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है।

रात 10.33 बजे तक अमावस्या का संयोग

आचार्य के अनुसार 20 जुलाई को श्रावण मास का तीसरा सोमवार है। इस दिन रात 10 बजकर 33 मिनट तक अमावस्या तिथि का महान संयोग है। उस दिन चंद्रमा अपनी कर्क राशि में रहेंगे। यह दोनों संयोग सोमवार को पड़ रहे हैं और भगवान भोलेनाथ तथा विष्णु जी के भक्तों के लिए मनोकामनाओं को पूर्ण करने की अपूर्व महत्ता में हैं।

मंगलकारी इच्छाओं की प्राप्ति

सोमवार को जब अमावस्या तिथि का संयोग होता है, उस दिन स्त्री-पुरुष भगवान भोलेनाथ और श्री विष्णु की आराधना करें। अपने परिवार तथा जीवन में सुख-समृद्धि, आयु, आरोग्य और हर प्रकार की मंगलकारी इच्छाओं की प्राप्ति के लिए व्रत करें।

विवाह की बाधाएं होंगी दूर

आचार्य बताते हैं कि जिनका विवाह नहीं हो रहा है, वह वर और कन्या सोमवती अमावस्या के दिन व्रत करें। संभव हो तो पीपल के वृक्ष के नीचे श्री विष्णु भगवान के चित्र को रखकर पीले फूल, पीले फल, यज्ञोपवीत, हल्दी, चंदन, श्रीखंड, धूप, दीप नैवेद्य से आराधना कर अपने शीघ्र विवाह के लिए निवेदन करें। साथ ही विवाह के बाद हर प्रकार से सुखद दांपत्य जीवन का भी वर मांगें।

व्रत न करें तो भी पूजा करें

आचार्य के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन हर व्यक्ति को पूजा करनी चाहिए। चाहे आप व्रत करें या न करें। कम से कम सोमवार की अमावस्या को भगवान भोलेनाथ और विष्णु जी की पूजा अवश्य कीजिए।

वैष्णव भोजन करें

प्रदोष व्रत हो या फिर सोमवती अमावस्या का व्रत। या तो आप फलाहार में रहिए या रात में बिना लहसुन-प्याज का वैष्णव भोजन कीजिए। मीठा भोजन भी कर सकते हैं। आपको जैसा उचित लगे, उसी प्रकार से व्रत कीजिए। भगवान में निष्ठा हो तो उसका परिणाम और पूजा का फल अच्छा ही होता है।

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