प्रदोष त्रयोदशी पर इस बार अभूतपूर्व संयोग, व्रत करने वालों को झूठे कलंक से मिलेगी मुक्ति निःसंतान दंपती की भरेगी गोद

ज्योतिषाचार्य डॉ सुधानंद झा के अनुसार शनिवार को प्रदोष त्रयोदशी पड़ने और व्रत करने से होती है यश की वृद्धि, मन की निराशा और नकारात्मकता होगी दूर

भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की आशीर्वाद मुद्रा वाली तस्वीर की करें पूजा, श्रद्धा से रहें पूरे दिन

senani.in

इस बार शनिवार (18 जुलाई और एक अगस्त) को प्रदोष त्रयोदशी व्रत पर अभूतपूर्व संयोग बन रहा है। यह व्रत करने वालों के जीवन की न सिर्फ सभी समस्याएं दूर होंगी, बल्कि मन में सकारात्मक विचार आएंगे और कार्यालय तथा जीवन के अन्य क्षेत्र में उनसे शत्रुता रखने वालों के मंसूबों पर पानी फिरेगा।

महान ज्योतिषी आचार्य डॉ सुधानंद झा के अनुसार सनातन शास्त्र में कहा जाता है कि यदि शनिवार को प्रदोष त्रयोदशी व्रत का संयोग हो तो वह भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने में समर्थ होता है। इस साल 18 जुलाई और एक अगस्त को शनिवार पड़ने से ऐसा ही संयोग बन रहा है।

ये है प्रदोषकाल

सायंकाल में सूर्यास्त से एक घंटे पहले से डेढ़ घंटे बाद तक का समय प्रदोष काल कहा जाता है।

घर पर भी हो सकती है पूजा

18 जुलाई को श्रावण मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का महान संयोग है। इसमें दिनभर व्रत किया जाता है। श्री शंकर भगवान और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इसके अलावा प्रदोष काल में आप या तो शिव मंदिर जाइए और वहीं पूजा-पाठ कीजिए या फिर घर में ही शंकर भगवान और माता पार्वती के चित्र पर पुष्प, बिल्वपत्र, चंदन, धूप, दीप और अगरबत्ती से पूजा कीजिए।

प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत का महत्व यह है कि जब हम बार-बार अपने परिवार में, समाज में, अपने कार्यालय में बिना मतलब, बिना गलती किए अपमानित होते हैं। उलटे दोषारोपण झेलना पड़ता है तो हमें बहुत कष्ट होता है।

पति-पत्नी में, पिता-पुत्र में, भाई-भाई में, कार्यालय में अपने मित्रों से, अपने बॉस से दूरी होती जाती है। बिना गलती किए मानसिक प्रताड़ना मिलने से आर्थिक और शारीरिक क्षति होती है।

इस क्षतिपूर्ति को महादेव पूरा करते हैं। कहने का तात्पर्य ये है कि बिना गलती किए जब हमारे माथे पर झूठे कलंक, झूठे आरोप साबित कर दिए जाते हैं तो हम शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से और आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। बहुत तो आत्महत्या तक कर लेते हैं।

ऐसी स्थिति में हमारे सनातन शास्त्र में हर महीने के दोनों पक्ष में कृष्ण पक्ष में और शुक्ल पक्ष में जो त्रयोदशी तिथि होती है, उसमें सायंकाल में अपने जीवन के दोषों और कलंक को दूर करने के लिए और सम्मान प्राप्ति के लिए, स्वार्थी लोगों से बचने के लिए, गिरे हुए लोगों की राजनीति से बचने के लिए, अपने जीवन में उन्नति के लिए शारीरिक मानसिक और आर्थिक उन्नति के लिए श्री शंकर भगवान और माता-पार्वती की पूजा का उपाय किया गया है।

प्रदोष का अर्थ ही होता है, जीवन के झूठे दोषारोपण, झूठे कलंक से निवारण।

निःसंतान दंपतियों के लिए वरदान

18 जुलाई 2020 को और एक अगस्त 2020 को शनि प्रदोष है। यह प्रदोष व्रत उन लोगों के लिए और महत्वपूर्ण होता है, जिन्हें संतान नहीं है। हर प्रदोष व्रत का महत्व जीवन के झूठे कलंक को और जीवन की असफलता को दूर करने के लिए होता है। लेकिन, शनि प्रदोष बिना संतान वाले माता-पिता के लिए वरदान सिद्ध होता है।

पीपल वृक्ष और शनिदेव की भी करें पूजा

श्रावण मास में कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 18 जुलाई को है और श्रावण मास शुक्ल पक्ष का शनि प्रदोष व्रत एक अगस्त को है। इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान भोलेनाथ की पूजा कीजिए। माता पार्वती की पूजा कीजिए और पीपल वृक्ष में शनि भगवान की पूजा कीजिए। आसपास में यदि कोई मंदिर है तो अवश्य जाइए लेकिन सामाजिक दूरी बनाकर रखें। मास्क पहनकर जाएं।

आचार्य कहते हैं कि कोरोना को देखते हुए मंदिर जाने की सलाह नहीं दी जा रही है।

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