सदाशिव महादेव

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डमरूधर शिवशंकर मेरे, सदाशिव सत्यम विषधारी।
नीलकंठ महादेव शिव, त्रिशूल विराजे मृगछाली।।

शीशमुकुट मे गंगा बहे, तीनों लोक करें संहार।
विष प्याला पीया महादेव, व्यथा हरे जग संसार।।

सावन कैलाशपति रिमझिम, भांग धतूरा मनभावन।
अविनाशी सदाशिव पालनहार, सुंदरम् वस्त्र धारण।।

नमः शिवाय जाप करो, नाश हो हृदय पीड़ा।
महादेव के लीला अपरंपार, छवि अद्भुत क्रीड़ा।।

गौरा के हृदय बसे, तपस्वी तप में पार्वती जलें।
उन्माद प्रेम-संचार हो, मानव कल्याण जग पलें।।

अंकिता सिन्हा
जमशेदपुर, झारखंड

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