आयकर रिटर्न देर से भरा तो आपको होगा बड़ा नुकसान

आस वेल्थ मैनेजमेंट के बिजनेस हेड अजय कुमार के अनुसार आईटीआर समय से फाइल नहीं किया तो आपको दस हजार रुपये तक का अर्थ दंड यानी पेनाल्टी चुकाना पड़ सकता है

senani.in

डिजिटल डेस्क

1 अप्रैल 2017 से प्रभावी आयकर कानून के सेक्शन 23 एएफ के अंतर्गत बदले नियमों के अनुसार अगर आपने समय पर आयकर रिटर्न यानी आईटीआर नहीं भरा तो आपको दस हजार रुपये तक का अर्थ दंड यानी पेनाल्टी भरना पड़ेगा।

ब्याज का भुगतान

आस वेल्थ मैनेजमेंट के बिजनेस हेड अजय कुमार गुप्ता के अनुसार अगर आपने निर्धारित तारीख तक या उससे पहले आईटीआर नहीं भरा तो बकाया आयकर पर आपको प्रतिमाह या एक माह के भाग पर एक प्रतिशत की दर से ब्याज भी भरना पड़ेगा। यह सेक्शन 234 ए के तहत आवश्यक है। इस बारे में उल्लेखनीय है कि अगर किसी ने आयकर का भुगतान नहीं किया है तो वह आईटीआर फाइल नहीं कर सकता। अर्थ दंड की गणना तय तिथि यानी 31 जुलाई (वर्तमान वित्तीय वर्ष यानी 2018-19 के लिए, 31 अगस्त 2019) होगी।

नुकसान को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं

अजय आगे बताते हैं कि अगर आपको वर्ष में कोई नुकसान हुआ है तो बताएं। हेड कैपिटल गेन में नुकसान हुआ है या बिजनेस में कोई नुकसान हुआ है तो तय तिथि के अंदर रिटर्न दाखिल करना सुनिश्चित करें। अगर ऐसा नहीं करते तो आप आगामी वर्षों के लिए आय निर्धारित करने के लिए इन नुकसानों को आगे समाहित करने से वंचित रह जाएंगे।

रिफंड देर से मिलने पर

ज्यादा कर अदायगी की स्थिति में अगर आप सरकार से रिफंड के हकदार हैं तो उसका भुगतान होगा। इसके लिए जरूरी है कि आप तय तिथि से पहले आईटीआर दाखिल करें। इससे रिफंड का जल्द भुगतान होगा।

01-07-2020 से बैंक खातों से कैश निकासी पर टीडीएस

टीडीएस पर सेक्शन सेक्शन 194 एन कहता है कि यदि कोई व्यक्ति एक या अधिक बैंक खातों से (इनमें को-आपरेटिव बैंक और पोस्ट आफिस भी शामिल हैं) रकम निकालता है तो 2020-21 से निकाली गई रकम पर दो प्रतिशत की दर से टीडीएस का भुगतान करना होगा। यह व्यवस्था पहली जुलाई 2020 से प्रभावी है।

देरी पर होगा ये नुकसान

समय पर रिटर्न दाखिल करने वाले के लिए थ्रेसहोल्ड लिमिट एक साल के लिए एक करोड़ रुपए होगी। अगर किसी व्यक्ति ने पिछले तीन साल से आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है और u/s 139 (1) के आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा पार हो चुकी हो तो थ्रेसहोल्ड लिमिट एक करोड़ से घटकर 20 लाख रुपए हो जाएगी।

इसके अलावा टीडीएस व्यवस्था निम्नवत होगी-

(अ) बीस लाख से एक करोड़ रुपए तक दो प्रतिशत

(ब) एक करोड़ रुपए के ऊपर पांच प्रतिशत

उदाहरण के तौर पर अगर कोई सात जुलाई 2020 को नकद निकासी करता है तो तीन आकलन वर्ष

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