उम्मीद की नई किरण, कोरोना के गंभीर रोगियों को दिया जा सकेगा इटोलिजुमाब इंजेक्शन

क्लीनिकल ट्रायल के बाद डीसीजीआई ने बेंगलुरु की कंपनी बायोकॉन में निर्मित इंजेक्शन को दी मंजूरी, सांस की दिक्कत वाले कोरोना मरीजों के इलाज में मिलेगी राहत

senani.in

डिजिटल डेस्क

कोरोना के लिए दवा और वैक्सीन विकसित करने के लिए दुनियाभर में लगातार शोध एवं अनुसंधान चल रहा है। लेकिन, अभी इसमें समय लगेगा।

इस बीच पहले से दूसरी बीमारियों के इलाज में दी जाने वाली दवाओं पर भी ट्रायल चल रहा है। इसी कड़ी में भारत में स्किन रोग के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन इटोलिजुमाब को कोरोना के गंभीर रोगियों को देने को मंजूरी दे दी गई है।

अभी प्लेक सोरायसिस में काम आता है यह इंजेक्शन

इटोलिजुमाब (आरडीएनए मूल) एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है, जिसे पहले से ही गंभीर पुरानी प्लेक सोरायसिस बीमारी में उपयोग के लिए मंजूरी मिली हुई है।

लेकिन हो सकेगा सीमित इस्तेमाल

अब ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने क्लिनिकल ट्रायल डेटा के आधार पर इस इटोलिजुमाब के सीमित आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दी है।

कोरोना के लिए किया गया तैयार

बेंगलुरु की कंपनी मेसर्स बायोकॉन वर्ष 2013 से अलजुमाब ब्रांड नाम के मध्यम से गंभीर पुरानी प्लेक सोरायसिस के रोगियों के उपचार के लिए इस दवा का निर्माण और विपणन कर रही है। इस स्वदेशी दवा को अब क्लीनिकल ट्रायल के बाद कोविड-19 के लिए पुनर्निर्मित किया गया है।

ट्रायल में मिले उत्साहजनक परिणाम

मेसर्स बायोकॉन ने कोविड-19 के रोगियों पर क्लीनिकल ट्रायल के बाद यह इंजेक्शन तैयार किया और परीक्षण के परिणाम डीसीजीआई के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इन परीक्षणों के परिणामों पर डीसीजीआई के कार्यालय की विषय विशेषज्ञ समिति में विवेचन किया गया।

मृत्यु दर में आएगी कमी

इस इंजेक्शन से गंभीर मरीजों की मृत्यु दर में कमी आने की संभावना है। यह इंजेक्शन मृत्यु दर के प्राथमिक समापन बिंदु, पीएओ2 और ऑक्सीजन (ओ2) संतृप्ति में सुधार जैसे फेफड़ों के कार्य के अन्य प्रमुख समापन बिंदु के विवरण प्रस्तुत किए गए। प्रमुख सूजन संबंधी चिन्ह आईएल-6, टीएनएफअल्फा आदि को भी पेश किया गया। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद और समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए डीसीजीआई ने कोविड-19 की वजह से मध्यम से गंभीर तीव्र श्वसन पीड़ा लक्षण (एआरडीएस) वाले रोगियों में साइटोकिन रिलीज सिंड्रोम (सीआरएस) के उपचार के लिए कुछ शर्तों जैसे रोगियों की सूचित सहमति, एक जोखिम प्रबंधन योजना, केवल अस्पताल में उपयोग किया जाना आदि, के अधीन दवा के प्रतिबंधित आपातकालीन उपयोग के तहत दवा का विपणन करने की अनुमति देने का फैसला किया है।

दवा की लागत भी कम

इस स्वदेशी दवा यानी इटोलिजुमाब के साथ उपचार की औसत लागत उन दवाओं की तुलना में कम है, जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कोविड-19 के लिए क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल में संकेतित ‘जांच चिकित्सा’ का हिस्सा हैं।

मल्टी ऑर्गन फेल्योर रुकेगा

दवा प्रो-इंफ्लेमेटरी साइटोकिन्स के उत्पादन को रोकती है, जिससे कोरोना रोगियों में सांस के सिंड्रोम और बहु-अंग विफलता होती है।

यहां हुआ दवा का परीक्षण

दवा का परीक्षण नई दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में किया गया। इनमें बेंगलुरु में नारायण हेल्थ, मुंबई में केईएम अस्पताल, बीवाईएल नायर चैरिटेबल अस्पताल और डॉ बालाभाई नानावती अस्पताल प्रमुख हैं। एम्स नई दिल्ली में इस पर सबसे पहले परीक्षण शुरू हुआ था।

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