बाघों की गणना के लिए सबसे ज्यादा कैमरे लगाकर भारत ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, गिनीज बुक में दर्ज हुई उपलब्धि

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
भारत के नाम दर्ज हुई बाघों की गणना के लिए विश्व के सबसे बड़े कैमरा ट्रैप वन्यजीव सर्वेक्षण की उपलब्धि, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने इसे महान क्षण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का बेहतरीन उदाहरण बताया

senani.in

डिजिटल डेस्क

भारत ने बाघों की गणना के लिए सबसे बड़ा कैमरा ट्रैप वन्यजीव सर्वेक्षण करके विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इस सर्वे का सुखद परिणाम ये है कि विश्व के 75 प्रतिशत बाघ भारत में पाए गए हैं।

देश के लिए अखिल भारतीय बाघ आकलन 2018 के चौथे चक्र ने, जिसके परिणाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले वर्ष वैश्विक बाघ दिवस पर घोषित किए गए थे, दुनिया का सबसे बड़ा कैमरा ट्रैप वन्यजीव सर्वेक्षण होने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।

जावेडकर ने किया ट्वीट

इस उपलब्धि को एक महान क्षण बताते हुए, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने अपने ट्वीट में कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत का जीता जागता उदाहरण है।

भारत ने चार साल पहले ही हासिल किया लक्ष्य

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने लक्ष्य से चार वर्ष पूर्व ही बाघों की संख्या दोगुनी करने वाले अपने संकल्प को पूरा कर लिया है।

देश में लगभग 2,967 बाघ

गणना के अनुसार, देश में बाधों की अनुमानित संख्या 2,967 हैं। इस संख्या के साथ, भारत में अकेले बाघों की संख्या विश्व के कुल बाघों के 75% के बराबर पहुंच गई है।

सेंट पीटर्सबर्ग में तय हुआ था लक्ष्य

भारत द्वारा वर्ष 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित बाघों की संख्या दोगुनी करने वाले अपने संकल्प को निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2022 से बहुत पहले ही प्राप्त किया जा चुका है।

गिनीज ने किया गुणगान

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की वेबसाइट के प्रशस्ति पत्र में लिखा गया है- 2018-19 में किया गया सर्वेक्षण संसाधन और डेटा दोनों के हिसाब से अब तक का सबसे व्यापक रहा है।

ये है कैमरा ट्रैप तकनीक

कैमरा ट्रैप (मोशन सेंसर्स के साथ लगे हुए बाहरी फोटोग्राफिक उपकरण, जो किसी भी जानवर के गुजरने पर रिकॉर्डिंग शुरू कर देते हैं) को 141 ​​विभिन्न साइटों में 26,838 स्थानों पर रखा गया था और 1,21,337 वर्ग किलोमीटर (46,848 वर्ग मील) के प्रभावी क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया। कुल मिलाकर, कैमरा ट्रैप ने वन्यजीवों की 3,48,58,623 तस्वीरों को खींचा (जिनमें 76,651 बाघों के, 51,777 तेंदुए के; शेष अन्य जीव-जंतुओं के थे)। इन तस्वीरों के माध्यम से, 2,461 बाघों (शावकों को छोड़कर) की पहचान स्ट्राइप-पैटर्न- रिकॉग्नाइज सॉफ्टवेयर का उपयोग करके की गई।

फुट सर्वेक्षण भी साथ-साथ

अभूतपूर्व रूप से कैमरा ट्रैप का उपयोग करने के साथ-साथ, 2018 “स्टेटस ऑफ टाइगर्स इन इंडिया” का मूल्यांकन व्यापक फुट सर्वेक्षण के माध्यम से भी किया गया, जिसमें 522,996 किमी (324,975 मील) का सफर तय किया गया और वनस्पति और खाद्य गोबर वाले 317,958 निवास स्थलों को शामिल किया गया। यह अनुमान लगाया गया कि अध्ययन किए गए वन का कुल क्षेत्रफल 381,200 वर्ग किमी (147,181 वर्ग मील) था और कुल मिलाकर 620,795 श्रम-दिवस आंकड़ों का संग्रह और समीक्षा करने में लगाया गया।

भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा तकनीकी समर्थन

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा अखिल भारतीय बाघ आकलन को भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा तकनीकी समर्थन के साथ चलाया जाता है और राज्य वन विभागों और भागीदारों द्वारा इसे कार्यान्वित किया जाता है।

वर्ष 2018 के नवीनतम परिणामों से पता चलता है कि भारत में अब बाघों की कुल अनुमानित संख्या 2,967 है, जिनमें से 2,461 बाघों को व्यक्तिगत रूप से कैप्चर किया गया है, जो बाघों की संख्या का 83% है और सर्वेक्षण की व्यापकता की प्रकृति को रेखांकित करता है।

दूर दूर तक कोई देश नहीं

पूरे विश्व में, प्रोजेक्ट टाइगर जैसा केंद्रित प्रजाति उन्मुखित कार्यक्रम के समानांतर शायद ही कोई अन्य कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत नौ
बाघ अभयारण्यों के साथ की गई थी और इसे वर्तमान में 50 बाघ अभयारण्यों में चलाया जा रहा है। बाघ संरक्षण में भारत ने अपने नेतृत्व की भूमिका मजबूती के साथ स्थापित कर ली है।

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