कोरोना से बचाएगा नारियल तेल!

स्वास्थ्य पत्रिका जर्नल ऑल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स के ताजा अंक में नारियल के तेल पर समीक्षा हुई प्रकाशित

senani.in

डिजिटल डेस्क

देश में कोरोना महामारी के बीच एक बार फिर नारियल के तेल और उसके फायदों पर बहस शुरू हो गई है।

भारत की प्रमुख स्वास्थ्य पत्रिका जर्नल ऑल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स के ताजा अंक में नारियल के तेल पर एक समीक्षा प्रकाशित हुई है। यह समीक्षा नारियल के तेल से इम्युन यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और रोगाणुओं यानी माइक्रोबेस से लड़ने की क्षमता पर केंद्रित है।

रोगाणुओं को कम करता है नारियल तेल

इंडियन कॉलेज ऑफ फिजिशियन के डीन और कोरोना से जुड़े महाराष्ट्र राज्य सरकार के टास्क फोर्स के सदस्य डा. शशांक जोशी का कहना है कि नारियल के तेल में लॉरिक एसिड होता है। यह संतृप्त वासा अम्ल है, जो आसानी से शरीर में घुल जाता है। भारत में लोग भोजन में खूब घी जैसे संतृप्त वसा अम्ल लेते हैं। यह शरीर के पाचन तंत्र यानी मेटाबॉलिज्म की जरूरत पूरी करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। नारियल के तेल की पिछले चार हजार साल से आयुर्वेदिक दवा के रूप में मान्यता है। नारियल के तेल को अगर भोजन में इस्तेमाल किया जाए या शरीर पर कहीं लगाया जाए तो लॉरिक एसिड निकलता है, जो मोनोलौरिन में बदलकर बैक्टीरिया, वायरस और फंगी जैसे रोगाणुओं को मारता है।

अमेरिका में भी बढ़ रहा इस्तेमाल

डा. जोशी का कहना है कि नारियल के तेल पर समीक्षा का मुख्य कारण कोरोना ही नहीं है। यह एक तथ्य है कि केरलवासी भोजन में नारियल के तेल का प्रचूर मात्रा में इस्तेमाल करते हैं और वे कोरोना का मुकाबला करने में काफी हद तक कामयाब रहे। इधर एक-दो साल में अमेरिका में लोग भोजन में नारियल के तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

कुछ चिकित्सक असहमत भी

हालांकि, इससे सभी डाक्टर सहमत नहीं हैं। इस बारे में एक चिकित्सक का कहना है कि ऐसा मानने का कोई आधार नहीं है कि नारियल का तेल कोरोना वायरस जैसे संक्रमण से बचा सकता है। यह बात सच है कि नारियल के तेल में ऐसे यौगिक पाए जाते हैं, जो रोगाणुओं का मुकाबला कर सकें। इसमें जिंक भी पाया जाता है, जो कोरोना के मरीजों को इम्युनिटी बढ़ाने के लिए दिया जाता है। लेकिन, डाक्टर का साथ में यह भी कहना था कि वह यह नहीं कह सकते कि आदमी का शरीर नारियल के तेल से इतने रसायनों में कितनों को और कैसे ग्रहण कर पाता है। ऐसे में लम्बे समय से यह बहस चली आ रही है कि नारियल के तेल का कैसे और किस रूप में इस्तेमाल किया जाए। क्योंकि, केरल में रसोई में वसायुक्त नारियल के तेल का जमकर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह वहां हृदय रोगियों की संख्या बहुत ज्यादा होने के पीछे प्रमुख कारण भी हो सकता है।

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