मूर्तिकार है शिक्षक…

शिष्य गीली मिट्टी हैं
मूर्तिकार है शिक्षक
सन्मार्ग बताने का
एक आधार है शिक्षक

इक विधाता की नींव
ही भाग्य बनाये
जीवन के लिये यह
सही मार्ग है शिक्षक
पहुंचा दे बुलंदी पे वो
उपकरण है शिक्षक

नारियल सा नम्र सदाचार,
संवारे शिष्य का जीवन
अंदर से वात्सल्य और
ऊपर से दिखाए कड़ापन
दिखता कठोर दिल पर
प्यार से भरा है शिक्षक

अपना हुनर लुटा के
जग का मान बढ़ाए
जब शिष्य योग्य निकले
तभी सुकून वह पाये
बनकर दीपक हरता,
सभी अंधियार है शिक्षक

बुद्धि वाले चाक पे
कुम्हार की तरह
जिंदगी के सुदृढ़
आधार की तरह
टेढ़ेपन को देता एक
आकार है शिक्षक

सब कल भी कहते थे
सभी आज कहते हैं
ये दुनिया है निसार
अंकिता देती है इन्हें,
सम्मान और शब्दाधार
अपनी लगन से छात्रों में
भरता सार है शिक्षक

-अंकिता सिन्हा
जमेशदपुर, झारखंड

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