गलवान, हॉट स्प्रिंग और गोगरा में डेढ़ किलोमीटर पीछे हटी चीनी सेना

गलवान नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण चीनी सेना के टेंटों में भरा पानी

senani.in

डिजिटल डेस्क

आखिरकार गलवान घाटी में चीनी सेना को अपने ठिकाने से पीछे हटना ही पड़ा। अभी-अभी खबर मिली है कि चीनी सेना गलवान, हॉट स्प्रिंग और गोगरा से डेढ़ किलोमीटर पीछे हट गई है।

इसकी वजह है, वह अभी जहां डेरा डाले बैठी थी उसके पिछले हिस्से में गलवान नदी की बाढ़ का पानी पहुंच गया था। अभी चीनी सेना एलएसी पर जहां भारतीय सेना से भिड़ंत हुई थी, उससे पांच किमी की दूरी पर तैनात थी।

बर्फ पिघलने से तेजी से बढ़ रहा गलवान नदी का जलस्तर

मीडिया रिपोर्ट में वरिष्ठ सैन्य कमांडर के हवाले से बताया गया है कि तापमान बढ़ने की वजह से बर्फीली गलवान नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। तेजी से बर्फ पिघलने की वजह से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण गलवान नदी के किनारे का कोई भी ठिकाना खतरनाक साबित होगा। सेटेलाइट और ड्रोन से ली गई तस्वीरों से साफ है कि गलवान नदी के किनारे के पीछे के ठिकानों पर स्थित चीनी सैनिकों के टेंटों में पानी घुस गया है। ऐसे में सैन्य अधिकारियों का कहना है कि चीनी सेना के लिए गलवान, गोग्रा, हाट स्प्रिंग और पैंगांग त्सो में मौजूदा ठिकानों पर बने रहना मुश्किल था।

दोनों सेनाओं में कई दौर की हो चुकी वार्ता

तनाव कम करने, सैनिकों को घटाने और अंतत: टकराव से पूर्व के ठिकानों पर लौटने के मुद्दे पर भारत-चीन दोनों देशों की सेनाओं के वरिष्ठ जनरलों के बीच तीन चक्र की वार्ता हो चुकी थी। दोनों पक्षों के बीच इस बारे में व्यापक पैमाने पर समझौता भी हो चुका था, लेकिन अभी तक जमीनी तौर पर ऐसा होता नहीं दिख रहा है।

अमेरिका ने दक्षिणी चीन सागर में जंगी बेड़ों को उतारा

अमेरिकी नौसेना दक्षिण चीन सागर में दो बड़े विमानवाहक पोतों-यूएसएस निमित्ज और यूएसएस रोनाल्ड रीगन को तैनात कर रही है। कहने को तो ये दोनों जंगी बेड़े युद्धाभ्यास के लिए यहां लाए जा रहे हैं, लेकिन यह एक साथ कई मोर्चे खोलकर दादागीरी दिखा रहे विस्तारवादी चीन पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी है। ये बेड़े जुलाई के पहले हफ्ते के आखिर तक फिलीपीन्स के लुजॉन जलडमरू मध्य को पार कर चुके थे। यही जलडमरू मध्य फिलीपीन्स सागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ता है। अमेरिका ने यह कदम चीन द्वारा विवादित जल क्षेत्र में युद्धाभ्यास के बाद उठाया है। चीन के युद्धाभ्यास का पड़ोसी देशों और अमेरिका ने काफी विरोध किया था। अमेरिकी नौसेना ने दक्षिण चीन सागर में अपने युद्धाभ्यास के बारे में कहा है कि इसका मकसद मुक्त और खुला प्रशांत क्षेत्र बनाना है। अमेरिकी रियर एडमिरल जनरल एम. विकॉफ ने बताया कि इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य अपने भागीदार और सहयोगी देशों को यह साफ संदेश देना है कि हम क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के प्रति समर्पित हैं। चीन दक्षिण चीन सागर के 90 प्रतिशत हिस्से पर अपना दावा जताता है। वहां से करीब तीन ट्रिलियन का व्यापार होता है। पिछले दशक में चीन ने दक्षिणी चीन सागर में कृत्रिम द्वीप के अलावा सैन्य ठिकाने और कई क्षेत्रों में सेना के इस्तेमाल वाली हवाई पट्टियां बना रखी हैं। ब्रूनेई, मलेशिया, फिलिपींस, ताइवान और वियतनाम भी दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करते हैं। चीन के आक्रामक रुख के कारण इन देशों के साथ उसके 21 विवादित मुद्दे हैं। (फोटो साभार, सोशल मीडिया)

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