रंगीन दुनिया के बदलते …

अनोखे दर्दों की इमारत है अंकिता,
आसुओं की कलम किताब नहीं मिलते।।

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@ अंकिता सिन्हा

जिंदगी की राहों में मरहम नहीं मिलते।
अपने लगते सब पर अपने नहीं मिलते।।

बेशक हमनशीं के चेहरें पर वफा देखें।
मुहब्बत की सच्ची निशानी नहीं मिलती।।

कितनी पीड़ा हो रही दिल को मेरे।
दवा दुआ के भी असर नहीं मिलते।।

रंगीन दुनिया के बदलते मौसमों में
साथी सच्चा हमसफर नहीं मिलते।।

खुशनसीं मुहब्बत के किस्से बयां।
मिलावटी दासतां अच्छे नहीं मिलते।।

कोसती गजल कलम को अब मेरी।
पीर स्याही बने, हमदर्द नहीं मिलते।।

अनोखे दर्दों की इमारत है अंकिता,
आसुओं की कलम किताब नहीं मिलते।।

-जमशेदपुर, झारखंड

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