भारत के खिलाफ चीन के दो मोर्चे

पाकिस्तान में भी सैन्य तैयारियों में जुटा चीन, राजस्थान और गिलगित में मोर्चाबंदी, भारत करारा जवाब देने के लिए तैयार

senani.in

डिजिटल डेस्क

चीन एक ओर जहां बातचीत का दिखावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत के खिलाफ मोर्चाबंदी और घेराबंदी तेज कर दी है। इस रणनीति में उसने अपने पिट्ठू पाकिस्तान को भी भागीदार बना लिया है।

चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास भारतीय क्षेत्रों पर दावा करने के साथ ही टैंकों, तोपों तथा विमानों की तैनाती भी तेज कर दी है। इसमें भारत का परंपरागत शत्रु पाकिस्तान भी उसका पूरा साथ दे रहा है। इसके चलते चीन ने पाक अधिकृत भारतीय क्षेत्रों और अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी अपनी सैनिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। उधर, भारत भी इन साजिशों का करारा जवाब देने के लिए तैयार है।

पाकिस्तानी सीमा में उड़ान भर रहे चीनी लड़ाकू विमान

चीन के विमान पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) और राजस्थान से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में उड़ान भरते देखे जा रहे हैं।

पाकिस्तान ने तैनात किए बीस हजार सैनिक

इस बीच भारत को दो मोर्चों की लड़ाई में फंसाने के लिए पाकिस्तान ने चीन का साथ देते हुए गिलगित-बाल्टिस्तान में भी दो डिवीजन यानी करीब 20 हजार सैनिक तैनात कर दिए हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान का यह इलाका उत्तरी लद्दाख की सीमा के नजदीक है। सूत्रों के मुताबिक इस बार पाकिस्तान ने यहां जितने सैनिक तैनात किए हैं, वह बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान की गई तैनाती से कहीं ज्यादा है।

चीन और पाकिस्तान सेना की कई दौर की बातचीत

गिलगित-बाल्टिस्तान में सेना की तैनाती से पहले चीन और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच कई बैठकें हुईं। वहीं, पाकिस्तान के एयर डिफेंस रडार भी पूरे क्षेत्र पर 24 घंटे नजर बनाए हुए हैं। पाकिस्तान और चीन सीमा पर सैनिकों की तैनाती और आतंकवादियों को उकसाने के प्रयासों से भारत को दो मोर्चों के साथ ही घाटी में आतंकवाद से भी लड़ना पड़ेगा।

यहां दो दशक से सक्रिय है चीन

चीनी एयरफोर्स पाक से सटी राजस्थान सीमा के पास सक्रिय हो गई है। यूं तो राजस्थान से सटी सीमा पर चीन करीब दो दशक से तेल, गैस, कोयले की खोज और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की आड़ में सक्रिय है, लेकिन खुफिया रिपोर्ट है कि इन दिनों वहां चीन की सक्रियता बढ़ गई है। हवाई ताकत में कमजोर चीन अब पीएलए के एयरबेस पर युद्धाभ्यास में जोर-शोर से जुट गया है। राजस्थान बॉर्डर के पास लगे पाकिस्तान के स्कार्दू एयरबेस पर चीन के ‘मिड एयर रिफ्यूलर’ आईएल 78 सहित कई लड़ाकू विमान देखे गए हैं।

हवाई ताकत में भारत भारी

दरअसल, भारत के मुकाबले चीन की हवाई ताकत कमजोर है। ऐसा इसलिए क्योंकि हिमालय की चोटियों में चीन का कोई बड़ा एयरबेस नहीं है। इसके अलावा चीन की वायुसेना को अभी तक एक भी युद्ध लड़ने का अनुभव नहीं है। ऐसे में वह अपनी हवाई ताकत मजबूत करने के लिए युद्धाभ्यास में जुटा है।

पाकिस्तान के लिए बंकर बना रहा चीन

चीन ने पाकिस्तान की सीमा चौकियों पर कई बंकर भी बनाए हैं। हालांकि, कहा जा रहा है कि ये बंकर पाकिस्तानी सेनाओं के इस्तेमाल के लिए बनाए गए हैं। यही नहीं, चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी या सीपेक) की वजह से 30 हजार से ज्यादा चीनी इंजीनियर और विशेषज्ञ यहां पहले से सक्रिय हैं। बाड़मेर के सामने जवाहर शाह, शामगढ़ से लगती सीमाओं पर गैस फील्ड में भी चीनी कंपनियां काम कर रही हैं।

भारतीय एजेंसियां सतर्क

उधर, पीओके में स्कार्दू एयरबेस पर चीनी वायुसेना की हरकतों ने भारतीय एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। केवल जून में ही 40 से ज्यादा चीनी फाइटर जेट जे 10 स्कार्दू गए हैं। आशंका है कि स्कार्दू का इस्तेमाल चीनी वायुसेना भारत में हमले के लिए करने की तैयारी कर रही है। स्कार्दू की लेह से दूरी लगभग 100 किमी है और ये किसी भी चीनी एयरबेस की तुलना में बहुत ज्यादा पास है। इसलिए इस बात की आशंका बढ़ गई है कि चीन स्कार्दू एयरबेस की क्षमताओं को परख रहा है, ताकि इसका इस्तेमाल किया जा सके।

लद्दाख के पास चीन के तीन एयरबेस

लद्दाख में इस्तेमाल करने के लिए चीन के पास तीन एयरबेस हैं, जहां से उसके फाइटर एयरक्राफ्ट कार्रवाई कर सकते हैं। ये हैं काशगर, होतान और नग्री गुरगुंसा। लेकिन, इनकी भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की क्षमताएं सीमित हैं। कारण, काशगर की लेह से दूरी 625 किमी, लेह से खोतान की दूरी 390 किमी और लेह से गुरगुंसा की दूरी 330 किमी है। ये सभी तिब्बत में 11 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित हैं। इतनी ऊंचाई से उड़ान भरने पर ईंधन और साथ ले जाने वाले हथियार दोनों का ही वजन कम रखना होता है। इससे फाइटर जेट की मारक क्षमता और रेंज दोनों ही कम हो जाती है। साथ ही इतनी लंबी दूरी की उड़ान को रडार से पकड़े जाने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए चीन पैंगोंग त्सो से करीब 200 किलोमीटर स्थित एक दूसरे एयरबेस को भी उन्नत बना रहा है। इस बात की जानकारी सेटेलाइट से मिली तस्वीरों से हुई है।

(फोटो साभार, इंडियन आर्मी की वेबसाइट)

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