एलएसी पर ‘भीष्म’ का पहरा

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन को किसी भी हरकत पर मुंहतोड़ जवाब देगी भारतीय सेना, किए जा रहे सभी जरूरी उपाय, टी-90 टैंक भीष्म तैनात

senani.in

डिजिटल डेस्क

लद्दाख में चीन से विवाद के बीच वार्ता के टेबल पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी तैयारियों को पुख्ता करने में जुटा है।

गलवान घाटी में चीन की हरकतों को देखते हुए भारतीय सेना ने सबसे खराब स्थिति से भी निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। इस रणनीति के तहत गलवान में छह टी-90 मिसाइल फायरिंग टैंक और टॉप-ऑफ-द-लाइन शोल्डर एंटी टैंक तैनात किए गए हैं।

भारत को कोई बदलाव मंजूर नहीं

उधर, एलएसी पर तनाव कम करने के लिए मंगलवार को भारत और चीन के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की चुशूल में बैठक हुई। इसमें भारत ने साफ कर दिया कि उसे यहां चीन द्वारा बनाई गई कोई भी नई सीमा रेखा मंजूर नहीं है।

तोप और लड़ाकू विमान मुस्तैद

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने एलएसी पर बख्तरबंद कर्मियों की तैनाती कर दी है और टेंट भी लगा लिये हैं। इसे देखते हुए भारतीय सेना ने भी वहां टी-90 टैंक भीष्म तैनात करने का निर्णय लिया। भारतीय सेना एलएसी के अपने हिस्से के भीतर इस क्षेत्र में प्रमुख ऊंचाइयों पर कब्जा कर रही है। 155 एमएम हॉवित्जर तोपों के साथ इन्फैंट्री लड़ाकू वाहनों को पूर्वी लद्दाख में 1597 किमी लंबी एलएसी के साथ तैनात किया गया है।

चुशूल में दो टैंक रेजिमेंट तैनात

चीन के किसी भी आक्रमण का जवाब देने के लिए चुशुल सेक्टर में दो टैंक रेजिमेंट तैनात किए गए हैं। इस क्षेत्र से वापसी के लिए चीनी सेना सौदेबाजी पर उतर आई है। लेकिन, भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह एक इंच भी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है।

सेना को पूरी छूट

सैन्य कमांडरों की मानें तो भारत इस बार सीमा विवाद पर लंबी खींचतान के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत सरकार की ओर से भी भारतीय सेना को पूरी छूट दे दी गई है। ऐसे में अगर चीन की ओर से कोई भी कदम उठाया जाता है तो भारतीय सेना उस पर जवाबी कार्रवाई कर सकती है।

भारतीय सेना अत्यधिक ऊंचाई पर लड़ाई के लिए प्रशिक्षित

यह क्षेत्र बेहद ठंडा माना जाता है, यहां पानी का तापमान शून्य डिग्री से नीचे रहता है। 1984 के बाद से भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा करने और पाकिस्तान सेना को पीछे हटाने के लिए इस अत्यधिक ऊंचाई वाले युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया गया था। चीनी पीएलए वायुसेना के अधिकांश लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों का मुकाबला करने के लिए एलएसी से सतह से 240 किमी दूर तकलामकन रेगिस्तान में हॉटन एयर बेस से उड़ान भर रहे हैं।

राफेल की डिलीवरी में तेजी लाने के निर्देश

इस बीच, एलएसी पर चीन के साथ बढ़ते तनाव के मद्देनजर भारतीय वायुसेना ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में तेजी लाने को कहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस भारत को राफेल की समय सीमा पर काम कर रहा है।

(फोटो साभार एडीजीपीआई इंडियन आर्मी, डिपार्टमेंट ऑफ सैनिक वेलफेयर और एयर फोर्स)

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