जान खतरा में डालेला ऊखमज…

भोजपुरी में कहानी, यह दूसरों के लिए सबक भी है कि कोई भी काम बिना सोचे-समझे करने से जान जोखिम में पड़ सकती है और उसका खामियाजा जिंदगीभर भुगतना पड़ सकता है।

senani.in

उमेश शुक्ल

रामजतन, इहै नाम रहल ओकर। ओके सब लरिका रामजतना बोलावत रहलैं। स्वभाव से ऊ बहुतै हुरदंगी रहल। लरिकन के बीच जब देख तब ऊ ऊखमज करत रहल। ओकरे के का पता रहल कि हरदम हुरदंग करै क ओकर आदत एक दिन ओकरे जिंदगीये कै खतरा में झोंक देई।

ओकरे गांव बेलारे शुकुल के लरिकै एक दिन सिवान के एक ओर आपन आपन बकरी-गाय और भईस लेके चरावत रहलैं। ओहि सिवान के एक हिस्सा में बिजुरी के कई ठो खंबा लागल रहलैं। ई खंबवै कुछै दिना पहिलै गाड़ल गइल रहलैं। एकरै ऊप्पर से तारों खिंचल रहलैं। एही तरवन से सगरे जवार में बिजुरी पहुंचाइल गइल रहल। ई बात हमरे सब गांव के सगरौ सयानन के मुंह सै सुनल गइल। लेकिन केहु न जानत रहल के बिजुरी के तार केतना खतरनाक होलैं। एही बात का पता तब चलल जब ऊखमजी रामजतना कै दुर्घटना भइल।

ओही दिना गांव कै सबै लरिका सिवान में आपन-आपन जानवर ले के गइल रहलैं। कुछ लरिका छुआ छुआई खेलत रहलैं तो कुछ गुल्ली डंडा। एही बीच रामजतना ऊहां पहुंचल। ऊ सबसे बोलल के सबन लोग चलल जायं नया खेल खेलैं। ऊ सबसे पुछलस, के के खंबा पर चढ़ सकेला। सगरी लरिकन के बीच सन्नाटा छाई गइल। केहु कुछ न बोलल। ऐहि बीच रामजतना खूब मचलल। ऊ कहलस के हम ई कइके दिखाई सकैंली। एगो लरिका रहल त्रिभुवना। ऊहो बहुत बड़बोलना रहल। ऊ कहलस चल देखाव के केतना ताकत बा तोहरे। ओकर एतना बात सुनिकै रामजतना झट से एक खंबा पै चढ़ै लागल। ऊ कुछ ऊपर तक जाई के नीचे ऊतर आइल। फिर इहै करतब ऊ दुई बार देखलइलस। एतना देख कै लरिकै खूब खुश भइलैं।

रामजतना के पता नाई कइसन धुन सवार हो गइल के ऊ बार-बार खंभवन पर ऊपर निच्चे चढ़ै औ उतरै। एही बीच जब त्रिभुवना से ओकर आदत न पचल तौ ऊ बोलल। का रे… तैं ऊपर वाला तार छू सकेला। ओकर एतना कहल काल बन गइल रामजतना क। पर रामजतना ओ से अनजानै रहल। ऊ त्रिभुवन के चिट्टा सुनिकै एक खंबा पर सर सर ऊप्पर चढ़ै लागल। ऊप्पर लागल तारन के जईसे ऊ पकड़लस तैसे ओकरा के लागल जोर कै झटका। साथै साथ ऊहां चिंगारी छिटकल। जब तक लरिकन कै कछु समझ मैं आवै रामजतना खंबा से दूर फेंका गइल। ओकर पूरा शरीर झुलस गइल रहल।

कुछ लरिकै दउर के रामजतना के घरें गइलन। ओकर माई और भाई अइलन ऊहां। सब ओके खटिया पै लादि कै अस्पताल लै गइलन। गांव जवार के सब लोगन में हल्ला मचल के रामजतना के करंट लाग गइल। संजोगन रामजतना के गांव के खोखा बाबू के मदद से फइजाबाद के अस्पताल तक पहुंचावल गइल। ऊंहा खोखा बाबू हर तरह से मदद देहलन। डागडर लोग कई दिन के इलाज के बाद बतवलन के रामजतना बच जाई लेकिन ओकर एक हाथ न बची। ओहमे जहर फइल गइल बा। रामजतना के बचावै के खातिर ओकर एक हाथ काटै के पड़ी। बहुत रोअलस रामजतना जब ओकर एक हाथ काट दिहल गइल लेकिन ओकरे परिवार के सब लोग बिबस रहलैं। डागडर के इलाज काम आईल। रामजतना बच गइल पर ओकर एक हाथ चल गइल। ओकरे खुद के ऊखमज के आदत से ई बात पूरे जवार में फैल गइल। सगरे लरिकन खातिर ओदाहरन औ नजीर बन गइल। ओकरा बाद से केहु खंबा के ऊप्पर चढ़लै के कोशिश ना कइलस।

हां, रामजतना के एक गो नाम और मिल गइल लूलवा। ओकरा के सब लोग लूलवा बोलावैं लगलं। ऐहि बात के ओकरा के जिंदगी भर मलाल रहल कै कि एक गलती कइसे भारी पड़ि गइल। ऊ सबके एहि बतावय के कइसै ऊखमज ओकरा के लूलवा बनाइ दिहिस। बाद मा ऊ सबका इहै समझावै के ऊखमज ना करौ। ऊखमज जान पै बन आवैला। ई जान खतरा मै डालेला।

(कहानी कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें)

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