रातभर की प्याज

गरीबी बहुत बड़ा दुष्चक्र है। इसमें हजारों बाबूलाल फंसे हुए हैं। हमें इन किसानों की माली हालत पर गौर करना चाहिए, जो आर्थिक ही नहीं अपितु सामाजिक और मानसिक समस्याओं से भी परेशान हैं।

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संध्या का समय हो रहा था। चुनकबा एक हाथ से छाता पकड़े और एक हाथ से साइकिल का हैंडल पकड़े चला आ रहा था। बारिश तेज होती जा रही थी और मेंढक की आवाज दसों दिशाओं में गूंज रही थी। प्याज की खुदाई करके वो खाना खाने घर आ रहा था। पीछे-पीछे बाबूलाल बैलों को नधे हुए बैल गाड़ी में प्याज भरे चला आ रहा था।

दोनों जामा बोने से लेकर प्याज उखाड़ने तक के विराट समय के बाद प्रतीक्षा करते हुए आज प्याज घर ला रहे थे। मन में खुशी थी कि अब प्याज बेचकर नीतू की शादी कर देंगे।

कुछ घंटों के बाद गाड़ी घर पहुंच गई। बाबूलाल चिल्लाया-लाला बाहर आय जा, प्याज आय गे। बाप की बात सुनकर लाला तौलिया बांधता हुआ बाहर आ गया और प्याज की बोरी बरामदे में रखवाने लगा।

एक पहर बीत चुका था। रेखा भात की हंडिया चढ़ाई हुई थी, उसका लड़का वहीं समीप में जलते हुए दीये को निहार रहा था। मानो उसका उजाला अपने अंधकारमय जीवन में लाने की जुगत लगा रहा हो।

अंततः प्याज रखकर सभी खाना खाने बैठ गए। उस समय आवारा पशुओं का बहुत आतंक था। ये खबर बाबूलाल को पता थी और एक खटिया भी प्याज की बोरियों के पास डाल चुका था। भोजन के बाद बाबूलाल खाट पे लेट गया। पता नहीं कब आंख लग गई। सुबह होते-होते, जब तक कि वह जगता, दो बोरी प्याज उस समय का कुख्यात चोर चिलिलाम चुरा ले गया था। वह ऐसे ही डाका किया करता था। बची प्याज पर जानवर छोड़ दिए थे। बाबू लाल ने सिर पीट लिया। प्याज उसकी अमानत थी, जिसको आज उसने अपने आगे लूटते देखा। वह हताश हो गया और तंबाखू घिसते-घिसते वहीं अचेत हो गया।

घर के लोग दौड़ पड़े। बाबू बेहोश हो चुका था। उसे नजदीक के अस्पताल ले गए। घर में बना उमंग का माहौल मानो कुछ ही पलों में कांच की तरह बिखर सा गया।

तफ्तीश हुई। दरोगा आया। लेकिन चोर हाथ ना आया। घर के लोग भी अब बाबूलाल की दवाई में ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते थे। करें भी कहां से, जब खाने के भी लाले पड़ रहे हों। गरीब किसान ने पहले अपनी फसल बर्बाद होते देखा फिर अपना घर और अब अपने बच्चे, जो उससे मुंह फेर रहे थे।

गरीबी बहुत बड़ा दुष्चक्र है। इसमें हजारों बाबूलाल फंसे हुए हैं। हमें इन किसानों की माली हालत पर गौर करना चाहिए, जो आर्थिक ही नहीं अपितु सामाजिक और मानसिक समस्याओं से भी परेशान हैं।

@ शैल

(अध्ययनरत, पंडित खुशीलाल शर्मा गवर्नमेंट ऑटोनोमस आयुर्वेदिक कॉलेज, भोपाल)

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