सूर्य ग्रहण पर क्या करें और क्या न करें

पौने चार घंटे के इस ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचने का उपाय बता रहे प्रसिद्ध ज्योतिषी आचार्य डॉ सुधानंद झा

डिजिटल डेस्क

आज यानी रविवार को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण का समय मिथिला पंचांग के अनुसार सुबह दस बजकर उन्नीस मिनट से दोपहर दो बजकर पांच मिनट तक रहेगा। काशी विश्वनाथ हृषिकेश पंचांग के अनुसार सुबह दस बजकर 31 मिनट से दोपहर दो बजकर पांच मिनट तक ग्रहण रहेगा।

पड़ोसी देशों में भी दिखेगा

जमशेदपुर के प्रसिद्ध ज्योतिषी आचार्य डॉ सुधानंद झा के अनुसार यह सूर्य ग्रहण पूरे भारतवर्ष और इसके आसपास के देशों में दिखाई देगा। साथ ही साथ विश्व के और भी देशों में दिखाई देगा। जैसे-अफ्रीका के उत्तर पूर्वी भागों में, दक्षिण पूर्व यूरोप, रूस के उत्तर पूर्वी भागों को छोड़कर बाकी पूरे एशिया महादेश, मध्य पूर्व देशों, इंडोनेशिया और माइक्रोनेशिया में भी यह दिखाई देगा।

इन राशियों के लिए लाभदायक

मेष, सिंह, कन्या और मकर राशि वालों के लिए यह सूर्य ग्रहण लाभदायक होगा। जबकि, अन्य राशियों पर इसका प्रभाव अच्छा नहीं पड़ेगा।

नंगी आंखों से न देखें ग्रहण

आचार्य के अनुसार किसी भी ग्रहण का शुभ या अशुभ प्रभाव उसको देखने के बाद ही होता है। अगर हम ग्रहण नहीं देखते हैं तो इसका अशुभ प्रभाव हमारे ऊपर बिल्कुल नहीं पड़ता है। विशेषकर विज्ञान भी नंगी आंखों से ग्रहण देखने से मना करता है।

भोजन के लिए करें ये उपाय

आज विज्ञान भी मना कर रहा है कि ग्रहण के समय भोजन, शयन आदि नहीं करना चाहिए। इसलिए सनातन शास्त्र में लिखा हुआ है कि ग्रहण से कम से कम एक घंटा पहले भोजन नहीं करना चाहिए। सोना नहीं चाहिए। जो सिद्ध भोजन है, उसे अच्छी तरह ढक दीजिए और उसे स्पर्श नहीं कीजिए। साथ ही यदि संभव हो तो पीने के पानी में कुश का पत्ता रख दीजिए। कुश न मिले तुलसी पत्ता भी रख सकते हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए उपाय

जो महिलाएं गर्भावस्था में हैं, वे अपने गर्भ को मोटे कपड़े से या किसी भी कपड़े से चारों ओर से ढककर गर्भस्थ शिशु को सुरक्षित करें। जब तक ग्रहण है, ईश्वर का ध्यान करते रहिए। यदि गर्भावस्था में महिला को किसी विशेष कारणवश नींद आ रही है तो एक दूसरा व्यक्ति उसके समीप बैठकर ईश्वर का ध्यान करे। गर्भावस्था वाली महिलाएं अपने शरीर की ऊंचाई से लगभग आठ उंगली अधिक लंबी पतली लकड़ी, छड़ी या सूता या रक्षासूत्र घर के कोने में लंबा करके रख दें और ग्रहण के बाद उसे किसी अच्छे स्थान पर रख दें। ऐसी महिलाएं विशेष परिस्थितियों में पानी, चाय या पतला दूध ले सकते हैं।

इनके लिए जरूरी नहीं हैं नियम

सनातन शास्त्र के अनुसार ग्रहण या व्रत पर्व का नियम, उन लोगों के लिए आवश्यक नहीं है, जो अस्वस्थ हैं, वृद्ध या दुर्बलता में हैं या जो कम अवस्था के बच्चे हैं।

ग्रहण के समय क्या करें

ग्रहण से पहले स्नान कर लीजिए और भगवान को बिना स्पर्श किए ही भजन-कीर्तन, पाठ-जप करें। हवन करें। किसी विशेष मंत्र की सिद्धि के लिए उसका जप करें। अपने जीवन के समस्या रूपी ग्रहण को दूर करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें।

ग्रहण के बाद पुनः करें स्नान, दान-पुण्य से मिलेगा लाभ

कुछ लोग ग्रहण से पहले और बाद में दोनों समय स्नान करते हैं, तो कुछ लोग केवल ग्रहण के बाद स्नान पूजा करते हैं। इसलिए ग्रहण से पहले स्नान करें या फिर नहीं किंतु ईश्वर का चिंतन पूजा जप अवश्य कीजिए। ग्रहण के बाद यज्ञोपवीत बदल लें। ग्रहण के बाद उन लोगों को दान दें, जिनके जीवन में कोई ग्रहण लग गया है। जैसे दिव्यांग, कुष्ठ रोगी आदि।

रोजाना वाली पूजा कर लें पहले

ग्रहण से पहले नित्य दिन की पूजा अवश्य कर लें। इसके बाद ग्रहण की पूजा आदि या फिर ग्रहण के बाद भी नित्य की पूजा कर सकते हैं।

ग्रहण से एक घंटे पहले से न करें भोजन

हम लोग गृहस्थ आश्रम में हैं। इसलिए ग्रहण लगने से एक घंटे पहले भोजन आदि बंद कर देंगे। जो लोग दस-बारह घंटे तक सूतक की बात करते हैं, वो मंदिरों, संन्यासियों और विशेष रूप से पूजा-अर्चना करने वाले लोगों के लिए है। सोचिए घर में बच्चे-बूढ़े, बीमार लोगों को दस घंटे तक कैसे रख सकते हैं भूखे।

प्रसव से बचें

डॉक्टरों को ग्रहण के समय प्रसव नहीं कराना चाहिए। ग्रहण के समय प्रसव कराने पर बच्चा मानसिक रूप से दुर्बल हो सकता है।

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