चीन को तगड़ा आर्थिक झटका देगा भारत

गलवान में भारतीय सैनिकों पर कायरतापूर्ण हमले से देशवाशियों में आक्रोश, चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का संकल्प पकड़ रहा जोर

उमेश शुक्ल

लद्दाख क्षेत्र में धोखे से भारतीय सेना के जवानों पर हमला करने की चीन के सैनिकों की धूर्ततापूर्ण कार्रवाई से पूरा देश भारी गुस्से में है। जगह-जगह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पुतले फूंककर चीन की सभी कंपनियों और उनके उत्पादों पर रोक लगाने की मांग बुलंद की जा रही है। जगह-जगह चीन के उत्पादों की होली जलाई जा रही है। देशवासियों का कहना है कि हम सभी चीन के उत्पादों का बायकाट करके ही उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं। ऐसा करके ही हम सभी उसकी धूर्तता पर अंकुश लगा सकते हैं। भारतीयों के तेवर बता रहे हैं कि आने वाले समय में भारत अपने धूर्त पड़ोसी को जोरदार आर्थिक झटका देने जा रहा है।

यही नहीं, कुछ दिन पहले चीन की सरकार के मुखपत्र के रूप में मशहूर अखबार ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख पर देश के छोटे व्यापारियों के संगठन के नेताओं ने चीन के उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए भारतीय सामान, हमारा अभिमान आंदोलन शुरू कर रखा है। अब यह उम्मीद है कि चीन के उत्पादों के बहिष्कार के आंदोलन को और बल मिलेगा। सिर्फ देश के छोटे और मझोले ही नहीं, बड़े व्यापारी और व्यापारिक घराने भी स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने के अभियान को पूरा बल देंगे। यदि वे ऐसा करते हैं तो निश्चित रूप से चीन की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगेगा।

कोरोना और चीन की ओर से देश की अर्थव्यवस्था के सम्मुख उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में भी देश के छोटे और मझोले व्यापारियों की अहम भूमिका है। ऐसे में छोटे व्यापारियों का स्वदेशी पर जोर देने का संकल्प देश की अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक सकता है। लेकिन, कोई भी बड़ा देशव्यापी आंदोलन छेड़ने से पहले उन्हें उन बिंदुओं पर भी गौर करना होगा, जिनके कारण देश में चीन के उत्पाद बहुतायत में आए। उन्हें यह भी ध्यान रखना होगा कि कैसे चीन के उत्पादों के आयात से बड़े व्यापारिक संस्थान मुंह मोड़ें। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि देश का कोई छोटा या मंझोला व्यापारी उन उत्पादों की खरीद-फरोख्त न करे जो चीन से आयातित हैं। ऐसा करने के लिए उन्हें व्यापक निगरानी तंत्र भी विकसित करना होगा। सभी व्यापारियों के अलावा उन्हें आम जनता को भी अपने साथ लेना होगा। उन्हें यह विश्वास दिलाना होगा कि छोटे व्यापारियों के फलने-फूलने से ही देश के आम लोगों को उनकी जरूरत की वस्तुएं मुनासिब दाम पर उपलब्ध होंगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स में कुछ दिन पहले प्रकाशित एक लेख में कहा गया कि भारत के पास चीन के उत्पादों के बहिष्कार की हैसियत नहीं है। उस पर भारत के छोटे कारोबारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के नेताओं ने कहा है कि चीनी अखबार की चुनौती स्वीकार है और देश के व्यापारी एवं नागरिक मिलकर इस बहिष्कार को सफल करके दिखाएंगे। कैट के नेताओं ने कहा है कि चीनी अखबार ने हिंदुस्तान के स्वाभिमान को ललकारा है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चीनी अखबार को इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने 10 जून से ‘भारतीय सामान-हमारा अभिमान’ आंदोलन शुरू कर दिया।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल पर वोकल’ के सशक्त आह्वान को मिल रहे जबरदस्त समर्थन से चीन के शासक बौखला गए हैं। अब उन्हें भारत का रिटेल बाजार अपने हाथ से निकालता नजर आ रहा है। इसीलिए चीनी अखबार ने इस तरह की ऊपटपटांग टिप्पणी की है। इसका माकूल जवाब देश के व्यापारी और नागरिक मिलकर देंगे।

कैट के नेताओं के मुताबिक, ग्लोबल टाइम्स ने लेख में यह भी कहा है कि चीनी सामान का इस्तेमाल भारतीयों की आदत में शामिल हो गया है और इसका बहिष्कार करना बिल्कुल संभव नहीं है। ऐसा कहकर चीनी अखबार ने भारत के व्यापारियों की शक्ति को नजर अंदाज किया है। अखबार यह भूल गया है कि हिंदुस्तानी जिसे चढ़ाना जानते हैं उसे उतारना भी उन्हें आता है। अब चीन सहित सारी दुनिया देखेगी कि किस प्रकार भारत में चीनी उत्पादों का बहिष्कार होता है और केवल डेढ़ वर्ष में यानी दिसंबर 2021 तक चीन से एक लाख करोड़ रुपये का आयात कैसे कम होता है। खंडेलवाल ने कहा है कि कैट अपने इस अभियान में भारतीय अर्थव्यवस्था के अन्य समूहों किसान, ट्रांसपोर्ट, लघु उद्योग, उद्योग, हॉकर्स, उपभोक्ता सहित अन्य स्वदेशी संगठनों का साथ लेगा।

जानकारों का मानना है कि अपना आंदोलन छेड़ने से पहले कैट के नेताओं को यह गौर करना होगा कि आखिर चीन के सरकारी अखबार ने क्यों ऐसा लिखा? उसके दावे के पीछे सबसे बड़े कारण कौन हैं? उन्हें समझना होगा कि भारत में चीन के उत्पादों का अंधाधुंध आयात ही उसके दावे का सबसे बड़ा कारण है। पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने की चाहत में भारतीय व्यापारियों ने जरूरत से कहीं ज्यादा आयात किया है। उन सामानों का भी आयात किया, जो बड़े पैमाने पर देश में बनाए जा सकते हैं। नतीजा यह रहा कि भारत चीन के उत्पादों का डंपिंग ग्राउंड बन गया। सालाना जरूरत से कई गुना ज्यादा चीन के उत्पाद भारत के विविध हिस्सों के गोदामों में भरे पड़े हैं। चीन को पता है कि देर सबेर भारतीय व्यापारी इसकी बिक्री करेंगे ही।
पिछले एक दशक के व्यापारिक क्रियाकलापों से चीन ने यह समझ लिया है कि भारतीय व्यापारिक संस्थानों की मन:स्थिति क्या है? चीन से भारी आयात के चलते भारत के स्वदेशी उद्योगों को तगड़ा झटका लगा है। बिजली उपकरणों और खिलौनों के तमाम प्रकार के उत्पाद जो भारत में ही बनते थे, वे अब लगभग रुक गए हैं। अब उनकी जगह चीनी उत्पादों ने घेर ली है। उद्योगों के कार्य ठप होने से रोजगार के मौके भी सिमटे हैं।

पिछले कुछ वर्षों से यह स्थिति है कि त्योहार भारत में होते हैं और आर्थिक समृद्धि चीन में बढ़ती है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय व्यापारियों ने ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने की मंशा से चीन से सामानों का अंधाधुंध आयात किया। हालांकि पिछले दो-तीन वर्षों में चीन से बढ़ते आयात से उपजी परिस्थितियों को लेकर देश में कुछ जागरूकता दिखी। यह बात भी उठी कि व्यवहार से सदैव कटुता जाहिर करने वाले चीन के उत्पादों का बहिष्कार होना चाहिए, लेकिन उसका ज्यादा असर दिखाई नहीं पड़ा।
जानकारों का मानना है कि कैट को देश के सभी लघु और मझोले व्यापारियों को जागरूक करने के साथ ही साथ बड़े व्यापारियों और व्यापारिक संस्थाओं से भी यह आग्रह करना होगा कि वे चीन के उत्पादों का आयात न करें। आमतौर पर बड़े व्यापारी ही वस्तुओं का आयात करते हैं। बाद में ढुलाई तंत्र के जरिये पूरे देश के छोटे-छोटे व्यापारियों तक पहुंचाते हैं।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s