सूतक काल पर भ्रांति करें दूर, 12 नहीं, ग्रहण से एक घंटे पहले भोजन और शारीरिक श्रम करें बंद

21 जून को पड़ने वाले सूर्य ग्रहण के सूतक काल को लेकर भ्रम दूर कर रहे हैं ज्योतिषी आचार्य डॉ सुधानंद झा

डिजिटल डेस्क

senani.in

21 जून को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इस सूर्य ग्रहण का समय मिथिला पंचांग के अनुसार सुबह 10.19 बजे से दोपहर 2.05 बजे तक रहेगा। काशी विश्वनाथ ऋषिकेष पंचांग के अनुसार सुबह 10.31 बजे से दोपहर 2.05 बजे तक सूर्यग्रहण रहेगा।

इसको लेकर पिछले कई दिनों से विभिन्न समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि 20 जून की रात 10.14 बजे से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा। ऐसे में सवाल ये उठता है कि इतनी लंबी अवधि के सूतक का पालन बच्चे, बुजर्ग, रोगी और गर्भवती महिलाएं कैसे करेंगी? क्या रात सवा दस बजे से दोपहर ढाई बजे तक बिना खाए-पीये रहना होगा? इन सब सवालों का जवाब हमने जमशेदपुर के प्रकांड ज्योतिषी आचार्य डॉ सुधानंद झा से जाना।

संन्यासियों, ब्रह्मचारियों और मंदिरों के लिए है 12 घंटे का प्रावधान

आचार्य ने बताया कि गृहस्थ आश्रम में रहने वालों को सूर्य ग्रहण से केवल एक घंटे पहले भोजन इत्यादि नहीं करना चाहिए। जहां तक बारह घंटे पहले सूतक लगने की बात है तो यह मंदिरों और संन्यास आश्रम यानी सन्यासियों तथा ब्रह्मचारियों पर लागू होता है।

आम आदमी के लिए ये है नियम

जो पूजा-पाठ करने वाले लोग हैं, ज्योतिषी हैं या घर के जिम्मेदार लोग हैं और समर्थ हैं, उनको ग्रहण से तीन घंटे पहले सूतक काल के नियमों का पालन करना चाहिए। तीन घंटे से ज्यादा सूतक काल का कहीं भी उल्लेख नहीं है।

ज्योतिष में नहीं है सूतक का वर्णन

आचार्य सुधानंद झा के अनुसार ज्योतिष में सूतक का कहीं वर्णन नहीं है। ज्योतिष में ग्रहण को एक खगोलीय घटना माना गया है।

ज्योतिष में कहा गया है कि जब ग्रहण लगता है तो सूर्य और चंद्रमा से निकलने वाली किरणें कमजोर पड़ जाती हैं। जिन किरणों से सृष्टि और यहां रहने वाले जीव-जंतु संचालित होते हैं, वो रश्मियां कमजोर पड़ जाती हैं।

इससे चराचर जगत में निवास करने वाले पेड़-पौधे, जीव-जंतु आदि को इस अवधि में किए गए किसी भी कार्य का पूरा लाभ नहीं मिलता। इस अवधि में खान-पान करने से पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है। शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए। सोना नहीं चाहिए। इसके मद्देनजर सूतक काल में स्नान, ध्यान और पूजा-पाठ, आदि का प्रावधान किया गया है।

ग्रहण अवधि में प्रसव टालने की करें कोशिश

आचार्य के अनुसार सूर्य या चंद्र ग्रहण से एक घंटा पहले और दो घंटे बाद तक प्रसव टालने की कोशिश करनी चहिए। ग्रहण में चूंकि सृष्टि को संचालित करने वाली सूर्य और चंद्रमा की रश्मियां कमजोर पड़ जाती हैं, इसलिए इस अवधि में जन्म लेने वाले बच्चों पर विपरीत असर पड़ता है। ग्रहण काल में अगर गर्भवतियों को नींद आ जाए तो घर के किसी अन्य सदस्य को उनकी ओर से भगवान का ध्यान करना चाहिए।

दान करें उनको, जिनके जीवन में हो कोई ग्रहण

आचार्य के अनुसार ग्रहण के बाद ऐसे व्यक्ति को दान करें, जिनके जीवन में कोई ग्रहण लगा हो। जिनके जीवन में मानसिक, आर्थिक और शारीरिक ग्रहण लगा हो। जो परेशान हों। जैसे, मंदिरों में पूजा-पाठ करने वाले गरीब ब्राह्मण, कुष्ठ रोगी, दिव्यांग आदि को दान करना चाहिए। दान से ज्यादा सहयोग का भाव होना चाहिए।

पूरे देश में दिखाई देगा यह ग्रहण

आचार्य सुधानंद झा के अनुसार यह सूर्य ग्रहण पूरे भारत के साथ ही आसपास के देशों में भी दिखाई देगा। इसके अलावा अफ्रीका के उत्तर पूर्वी भागों में, दक्षिण पूर्व यूरोप, रूस के उत्तर पूर्वी भागों को छोड़कर पूरे एशिया महाद्वीप, मध्य पूर्व देशों, इंडोनेशिया और माइक्रोनेशिया में भी दिखाई देगा।

जानिए किस राशि पर क्या पड़ेगा असर

मेष, सिंह, कन्या और मकर राशि वालों को यह सूर्यग्रहण लाभान्वित करेगा, जबकि अन्य राशियों पर इसका प्रभाव अच्छा नहीं पड़ेगा।

ग्रहण न देखकर बच सकते हैं इसके दुष्प्रभाव से

आचार्य सुधानंद झा के अनुसार किसी भी ग्रहण का अशुभ प्रभाव उसको देखने के बाद ही होता है। यदि हम ग्रहण नहीं देखते हैं तो उसका प्रभाव बिल्कुल नहीं पड़ता है। इसलिए किसी भी ग्रहण को नहीं देखना चाहिए। विशेषकर नंगी आंखों से। विज्ञान भी नंगी
आंखों से ग्रहण देखने से मना करता है।

कोरोना पर विजय की शुरुआत

आचार्य के अनुसार आषाढ़ महीने में इक्कीस जून को लगने वाले इस सूर्य ग्रहण का कोरोना के लिए शुभ प्रभाव देखने को मिलेगा। पूरे विश्व को 21 जून के बाद से कोरोना की समस्या से मुक्ति मिलने लगेगी। कोरोना योद्धाओं की जीत होती जाएगी और कोरोना वायरस समाप्त होने लगेगा।

राजनीति में नकारात्मक लोगों की बढ़ेगी सक्रियता

इस सूर्यग्रहण के प्रभाव से राजनीति बहुत ही निम्न स्तर पर होगी। अधिकतर विपक्षी दलों की राजनीति अपने-अपने देश और समाज की एकता-अखंडता के लिए नकारात्मक होगी।

ग्रह मचाएंगे उथल-पुथल

पूरे विश्व में नब्बे प्रतिशत विरोधियों की राजनीति नवंबर 2020 तक निम्न स्तर पर होगी। कारण, 21 जून को सूर्य ग्रहण के समय बुध, शुक्र, शनि और वृहस्पति ये चारों ग्रह वक्री अवस्था में रहेंगे। वृहस्पति अपनी नीच राशि में रहेंगे। शनि अपनी ही राशि मकर में वृहस्पति के साथ रहेंगे। देश की सांप्रदायिक एकता और सामाजिक सौहार्द को हर प्रकार से बर्बाद करने की नकारात्मक गतिविधियां होंगी। अधिकांश विरोधी पार्टियों में देश विरोधी धर्मगुरुओं की और अगले चुनाव में अपनी रोटी सेंकने वाले नेताओं की सक्रियता बढ़ेगी।

संयमित और संतुलित रहें

आचार्य कहते हैं कि 21 मार्च 2021 तक विश्व के हर मनुष्य को अपने आहार-विहार खान-पान और रहन-सहन को सुव्यवस्थित तथा संतुलित रखना पड़ेगा। जो वर्तमान संकट है, इसका प्रभाव मार्च दो हजार इक्कीस तक रहेगा।

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