डिजिटल का दौर, युवाओं का नया ठौर

सास-बहू वाले सीरियल से खुद को कनेक्ट नहीं कर पा रहे युवाओं ने वेब सीरीज और डिजिटल प्लेटफॉर्म को बनाया मनोरंजन का नया अड्डा

डिजिटल प्लेटफॉर्म यानी ओटीटी (ओवर द टॉप) देश में तेजी से बढ़ रहा है। देश में लगभग आठ साल पहले शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म ने खुद को टेलीविजन और थियेटर के सशक्त विकल्प के रूप में पेश किया है। खासतौर पर युवाओं की यह पहली पसंद बन चुका है।

टीवी पर युवाओं के मनोरंजन के लिए कंटेंट की कमी

डिजिटल डेस्क

बॉलीवुड के एक उभरते डायरेक्टर कहते हैं कि आज का युवा ग्लोबल सिटीजन हो चुका है। उसे भारत में हो रहे किसी घटनाक्रम की जानकारी चाहिए तो अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोप की फिल्में और वहां क्या चल रहा है, इसकी भी जानकारी चाहिए। चूंकि, फिल्में या धारावाहिक समाज का आईना होती हैं, इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने वाले कार्यक्रम उसे इन बदलावों से अवगत भी करा रहे हैं। साथ ही एक सीटिंग में ही मनोरंजन का खजाना उपलब्ध हो जा रहा है।

सास-बहू के कॉन्सेप्ट से आगे नहीं बढ़ पा रहे एंटरटेनमेंट चैनल

देश के एंटरटेनमेंट चैनलों के प्राइम टाइम (शाम आठ से दस बजे) पर सास-बहू वाले सीरियल का लगभग कब्जा हो चुका है। ये सीरियल तीन से पांच साल तक घिसटते हुए चलते रहते हैं। सीआइडी, सावधान इंडिया या इस तरह के धारावाहिक भी अब हाशिये पर चले गए हैं। ऐसे में युवा नेटफ्लिक्स, अमेजन और इस तरह के माध्यमों पर अपना ठिकाना ढूंढ रहे हैं।

अनलिमिटेड एंटरटेनमेंट

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कार्यक्रमों, फिल्मों और वेब सीरीज में जहां नयापन है, वहीं ये बेमतलब खींचे भी नहीं जाते हैं। वेब सीरीज की बात करें तो यहां एक बार में ही इसके सात या आठ एपिसोड रिलीज हो जाते हैं। सभी का विषय भी अलग होता है। 45 मिनट या एक घंटे का एक एपिसोड होता है।कलाकार और टेक्नोलॉजी भी अलग एहसास कराते हैं।

कहीं भी और कभी भी मनोरंजन

हर प्लेटफॉर्म पर कई देशों की फिल्में और वेब सीरीज उपलब्ध हैं। इन्हें आप कहीं भी और कभी भी मोबाइल पर देख सकते हैं। टीवी पर ये सुविधा उपलब्ध नहीं है। देश के एक नामी आइआइटी के छात्र अमरेंद्र कहते हैं कि टेलीविजन पर आने वाला कोई भी कार्यक्रम, चाहे वह फिल्म हो या सीरियल, वह एक सीटिंग में खत्म नहीं हो सकता। ऊपर से आधे-एक घंटे के कार्यक्रम में आधा समय विज्ञापन में निकल जाता है। इसमें समय बर्बाद हो जाता है। इसके उलट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक बार में एक फिल्म या वेब सीरीज का एक एपिसोड पूरा हो जाता है।

समय की भी बचत

दिल्ली की मेडिकल छात्रा पूजा चौधरी कहती हैं कि सिनेमा हॉल में फिल्म देखने जाने में भी तमाम दिक्कतें हैं। एक तो आने-जाने में समय बर्बाद होता है, ऊपर से तमाम तरह की और भी प्रॉब्लम हैं। इसके विपरीत आप डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नए सब्जेक्ट और नई टेक्नोलॉजी से बनी फिल्म या इंडियन फिल्में भी मोबाइल पर जब मौका मिले देख सकते हैं।

क्या है डिजिटल प्लेटफॉर्म

हॉट स्टार, नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो जैसे एप डिजिटल पालटफॉर्म कहे जाते हैं। इन पर आप कहीं और कभी भी अपनी पसंदीदा वेब सीरीज, फिल्म, यहां तक की टीवी सीरियल भी देख सकते हैं। बस, नेट कनेक्टिविटी होनी चाहिए।

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