तो क्या एक तिहाई लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं?

आईसीएमआर के अध्ययन में प्रकाश में आई बेहद डरावनी बात

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) कोरोना के मोर्चे पर आगे बढ़कर लड़ रहा है। काउंसिल फिलहाल एक स्टडी कर रहा जिसके बारे में सूत्रों के माध्यम से कुछ बातें सामने आई हैं। स्टडी के शुरुआती नतीजों में आशंका जताई जा रही है कि हॉटस्पॉट्स और कंटेनमेंट जोन में रह रही देश की एक तिहाई जनता कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकती है या फिर संक्रमित होकर ठीक भी हो चुकी है। एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक आईसीएमआर ने जनसंख्या के आधार पर सेरो सर्वे किया था, जिसके तहत अध्ययन चल रहा है। सूत्रों के जरिए पता चला है कि देश की 15 से 30 फीसदी आबादी (करीब एक तिहाई) वायरस की चपेट में आ चुकी है। वहीं सबसे ज्यादा संक्रमण मुंबई, दिल्ली, पुणे, अहमदाबाद और इंदौर में है।


कैसे लिए गए सैंपल्स?


आईसीएमआर की रिसर्च बॉडी ने इस सर्वे के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की कि हाई रिस्क जोन में वायरस किस हद तक फैला है। टेस्टिंग प्रोटोकॉल के जरिए देश के टॉप 10 हाई रिस्क शहरों से सैंपल्स लिए गए। ये दस शहर हैं-मुंबई, ठाणे, पुणे, अहमदाबाद, सूरत, दिल्ली, कोलकाता, इंदौर, जयपुर और चेन्नई। इन शहरों के 10 कंटेनमेंट जोन को रैंडमली चुना गया। वहां से 500-500 सैंपल्स लिये गये। इनके अलावा देश के 21 राज्यों के 60 अन्य जिलों से भी 400-400 सैंपल्स लिये गए। इन जिलों को कोरोना के मामलों की संख्या के आधार पर बांटा गया था। इनमें से किसी में कम केस थे, किसी में थोड़े ज्यादा तो किसी में काफी ज्यादा।
आईसीएमआर ने अपने सर्वे में ईएलआईएसए आधारित एंटीबॉडी टेस्ट का इस्तेमाल किया। ईएलआईएसए यानी (एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसोर्बेंट एसे)। इस किट को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी, पुणे ने तैयार किया था। इसके जरिए वायरस से लडऩे वाले एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है। पहले ये रिसर्च चीन से आई रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट से होना था, लेकिन उसमें खामियां निकलने के बाद ईएलआईएसए के जरिए सेरो सर्वे किया गया। सूत्रों का कहना है कि अभी आठ जिलों के आंकड़ों पर रिसर्च चल ही रही है, फाइनल रिपोर्ट इस हफ्ते के आखिर तक आएगी।

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